पटना: बिहार के सरकारी स्कूलों में अब 9वीं से लेकर 12वीं तक के छात्रों को हिन्दी के टीचर अंग्रेजी और संस्कृत पढ़ाएंगे। बिहार के शिक्षा विभाग ने हिन्दी से पोस्ट-ग्रेजुएशन (पीजी) करने वाले शिक्षकों को आदेश दिया है कि वे बच्चों को संस्कृत पढ़ाएं, हालांकि उन्होंने कभी संस्कृत का अध्ययन नहीं किया। इस फैसले के तहत, बिहार के सरकारी हाई स्कूलों में अब केवल तीन शिक्षकों को रखने का निर्णय लिया गया है, जो कई भाषाएं जैसे हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू, बंगला, मैथिली, फारसी और अरबी पढ़ाएंगे। शिक्षा विभाग को इस बात की चिंता नहीं है कि इन शिक्षकों से छात्रों की गुणवत्ता की पढ़ाई कैसे होगी।
शिक्षा विभाग का नया आदेश
असल में, बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने 5 फरवरी 2025 को एक नया फरमान जारी किया है। इसमें सरकारी हाई स्कूलों के लिए 11 पदों में से 3 पद घटाए गए हैं। इसका मतलब यह हुआ कि हर स्कूल में अब सिर्फ 8 पद होंगे, जिनमें हेडमास्टर, शिक्षक, और चपरासी शामिल होंगे।
इस फैसले की असल वजह
बिहार सरकार ने 1980 में एक नियम जारी किया था, जिसमें हर स्कूल में कुल 9 शिक्षक और कुछ अन्य कर्मचारी होते थे। लेकिन अब नीतीश सरकार ने इस नियम को बदल दिया है और अब भाषा की पढ़ाई के लिए सिर्फ 3 शिक्षकों को नियुक्त किया जाएगा, जो सभी भाषाओं को पढ़ाएंगे।
हिन्दी के शिक्षक को अंग्रेजी पढ़ाने का आदेश
अब तक बिहार लोकसेवा आयोग (BPSC) के माध्यम से शिक्षकों की भर्ती होती थी, जिसमें विषय के आधार पर नियुक्ति की जाती थी। इसके तहत, जिस शिक्षक ने हिन्दी में पीजी किया था, उसे हिन्दी का टीचर बनाया जाता था। अब बिहार सरकार ने आदेश दिया है कि इन शिक्षकों को अंग्रेजी और संस्कृत जैसे विषय भी पढ़ाने होंगे, जिनका वे कभी अध्ययन नहीं करते थे।
विज्ञान विषयों में भी बदलाव
इसके अलावा, बिहार सरकार ने विज्ञान के विषयों में भी बदलाव किया है। अब एक शिक्षक को जूलॉजी और बॉटनी दोनों ही विषय पढ़ाने होंगे, भले ही उन्होंने किसी एक विषय में पीजी किया हो।
शिक्षक संघ का विरोध
बिहार राज्य माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव शत्रुध्न प्रसाद सिंह ने इस आदेश का विरोध किया है। उन्होंने इसे अवैज्ञानिक और अव्यावहारिक कदम बताया है, जिससे बिहार के सरकारी स्कूलों में छात्रों का भविष्य संकट में पड़ जाएगा। उनका कहना है कि सरकार का यह कदम बच्चों की प्रतिभा को नष्ट करने के समान है।
शिक्षक संघ का गहरा विरोध
शत्रुध्न प्रसाद सिंह ने यह भी कहा कि बिहार सरकार ने सरकारी स्कूलों में 12 भाषाओं के विषयों में से 8 पद घटाकर छात्रों के भविष्य के साथ खेला है। इस कदम से शिक्षकों का मनोबल टूटेगा और छात्रों को अन्य स्कूलों में ट्रांसफर कर दिया जाएगा, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होगी।
सांसदों का भी विरोध
इस मामले में एमएलसी प्रो. संजय कुमार सिंह और डॉ. संजीव कुमार सिंह ने भी सरकार से आग्रह किया है कि वह स्कूलों में पहले से स्वीकृत पदों और विषयों में कटौती न करें। उनका कहना है कि भारतीय संविधान में उर्दू, संस्कृत, मैथिली, बंगला जैसे विषयों के लिए कोई कटौती नहीं की जा सकती।
यह कदम शिक्षा विभाग के द्वारा लिया गया है, लेकिन शिक्षक संघ, एमएलसी और अन्य नेताओं द्वारा इसकी आलोचना की जा रही है। उनका मानना है कि इससे छात्रों की शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और उनका भविष्य संकट में आ जाएगा।




































