नई दिल्ली: वक्फ (संशोधन) विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष और भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने गुरुवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को अपनी समिति की अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है। यह रिपोर्ट वक्फ विधेयक 1995 में किए गए 25 संशोधनों और मसौदा रिपोर्ट पर आधारित है।
संशोधित विधेयक पर विपक्षी असहमति
जेपीसी ने बुधवार को वक्फ विधेयक पर मसौदा रिपोर्ट को स्वीकृति दी और संशोधित विधेयक को अपनाया। हालांकि, विपक्षी नेताओं ने इस रिपोर्ट पर अपनी असहमति जताई है। जदयू, तृणमूल कांग्रेस, और एआईएमआईएम समेत विपक्षी दलों ने इस विधेयक के खिलाफ विरोध दर्ज किया है।
विधेयक में किए गए सुधार
जेपीसी के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने कहा कि इस बार पहली बार एक खंड शामिल किया गया है जिसमें कहा गया है कि वक्फ का लाभ गरीबों, महिलाओं, अनाथों और हाशिए पर रहने वाले लोगों तक पहुंचे। उन्होंने बताया कि 44 खंडों में से 14 खंडों पर संशोधन प्रस्तावित किए गए थे, जिन्हें बहुमत से पारित किया गया।
विपक्षी आलोचना
भा.ज.पा. सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने विपक्षी नेताओं की आलोचना करते हुए कहा कि उनकी सरकार का विरोध करना आदत बन गई है। भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाना है, और वह निहित स्वार्थों द्वारा कानून के दुरुपयोग को रोकने की कोशिश कर रहे हैं।
ओवैसी का विरोध
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस विधेयक पर अपना विरोध जाहिर करते हुए कहा कि इस बिल का उद्देश्य वक्फ बोर्ड को नुकसान पहुंचाना और मस्जिदों पर कब्जा करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक मुस्लिम समुदाय के खिलाफ है। ओवैसी ने कहा कि वे इस बिल का संसद में भी विरोध करेंगे।
अन्य विपक्षी नेताओं की असहमति
तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी और शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने भी रिपोर्ट पर असहमति व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि किए गए संशोधन संविधान के खिलाफ हैं।
विधेयक का संसद में पेश होना
वक्फ (संशोधन) विधेयक संसद के आगामी बजट सत्र में पेश किए जाने की संभावना है, जो 31 जनवरी से शुरू होकर 4 अप्रैल तक चलेगा। केंद्रीय बजट एक फरवरी को पेश किया जाएगा। इस विधेयक का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के कुप्रबंधन और अतिक्रमण जैसी समस्याओं का समाधान करना है।
विधेयक का उद्देश्य और सुधार
वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों की डिजिटल रिकॉर्डिंग, बेहतर ऑडिट, पारदर्शिता, और अवैध कब्जों को पुनः प्राप्त करने के लिए कानूनी उपायों को लागू करना है।
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