श्रीनगर: दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में सुरक्षा बलों ने हिजबुल मुजाहिदीन के शीर्ष आतंकवादी को मुठभेड़ में मार गिराने में कामयाबी हासिल की है। यह आतंकवादी हिजबुल का वरिष्ठ कमांडर फारूक अहमद, उर्फ नाली, उर्फ उमर था। फारूक कश्मीर में सबसे लंबे समय तक सक्रिय रहने वाले आतंकवादियों में से एक था।
मुठभेड़ की जानकारी
सुबह से पहले कुलगाम के बेहीबाग स्थित कद्देर गांव में आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर सेना और पुलिस ने संयुक्त अभियान शुरू किया। फारूक अपने चार साथियों के साथ इसी इलाके में छिपा हुआ था। इस मुठभेड़ में फारूक समेत पांच आतंकियों को मार गिराया गया। फारूक के सिर पर 10 लाख रुपये का इनाम था।
हिजबुल के लिए बड़ा झटका
जुलाई के बाद से यह हिजबुल आतंकियों के खिलाफ दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले सुरक्षा बलों ने चार आतंकियों को मार गिराया था। लेकिन प्रवासी श्रमिकों और नागरिकों की चुनिंदा हत्याओं में शामिल फारूक की मौत को हिजबुल के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है। वह लंबे समय से सुरक्षा बलों से बचता आ रहा था।
आतंकी गतिविधियों में शामिल
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, फारूक ने दक्षिण कश्मीर में हिजबुल के माध्यम से आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दिया। वह गैर-स्थानीय प्रवासियों और कश्मीरी पंडितों पर हमलों का मुख्य आरोपी था। 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद से कई ऐसी हत्याएं हुईं, जिनमें उसका हाथ बताया गया।
कई हत्याओं का मास्टरमाइंड
मार्च 2022 में फारूक ने पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के इशारे पर कुलगाम के अडूरा गांव में सरपंच शब्बीर अहमद मीर की उनके घर में हत्या करवाई थी। उसने इस वारदात को अपने साथियों के जरिए अंजाम दिया, जिन्हें बाद में गिरफ्तार कर लिया गया।
लंबे समय से फरार
फारूक 2015 में आतंकी बना और तभी से फरार था। 2019 में उसने कुलगाम में पांच प्रवासी श्रमिकों की हत्या की थी। इस मामले में पुलिस ने उसके घर पर छापा भी मारा था।
आतंक रोधी अभियान जारी
जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीआईजी दक्षिण कश्मीर, जाविद इकबाल मट्टू ने पांच आतंकियों के मारे जाने की पुष्टि की है। हालांकि, अभी तक सभी की पहचान उजागर नहीं की गई है। सुरक्षा बलों का अभियान अभी भी जारी है, और आतंकियों के शव बरामद किए जा रहे हैं।



































