पटना: बिहार बीजेपी अपने संगठन में बड़े बदलाव करने की योजना बना रही है। मंडल और संगठन जिलों की संख्या में बढ़ोतरी की जा रही है। साथ ही, मंडल अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष बनने के लिए नई शर्तें लागू की गई हैं। पार्टी ने संगठन महापर्व के दौरान इन सख्त नियमों को लागू करने का निर्णय लिया है। इस नई व्यवस्था के चलते कई नेता जिलाध्यक्ष बनने की दौड़ से बाहर हो जाएंगे।
सख्त हुए मंडल अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष बनने के नियम
बिहार बीजेपी ने मंडल अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष नियुक्ति के लिए इस बार कड़े नियम लागू किए हैं। 15 दिसंबर 2024 तक सभी मंडलों में नए अध्यक्ष नियुक्त किए जाएंगे, जबकि 30 दिसंबर तक सभी संगठन जिलों में जिलाध्यक्ष नियुक्त होंगे। इस प्रक्रिया को लेकर पार्टी की जिला कोर कमेटी की बैठकें लगातार हो रही हैं। अब तक 15 से अधिक संगठन जिलों की बैठकें पूरी हो चुकी हैं। नए नियमों के तहत:
1. 45 वर्ष से अधिक उम्र के नेता मंडल अध्यक्ष नहीं बन सकते।
2. 60 वर्ष की आयु पार कर चुके नेता जिलाध्यक्ष पद के लिए अयोग्य होंगे।
3. पार्टी में छह साल से कम समय बिताने वाले नेता जिलाध्यक्ष नहीं बन पाएंगे।
4. जो नेता दो बार जिलाध्यक्ष रह चुके हैं, उन्हें भी इस पद पर नियुक्ति नहीं मिलेगी।
संगठन जिला और मंडल की संख्या में होगी बढ़ोतरी
बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिलीप जायसवाल ने जानकारी दी कि पार्टी की जिला कोर कमेटी की बैठक अगले तीन दिनों तक जारी रहेगी। फिलहाल बिहार में 45 संगठन जिले हैं, लेकिन परिसीमन के बाद इनकी संख्या 51 या उससे अधिक हो सकती है। 6-7 नए संगठन जिलों का गठन किया जाएगा ताकि 2025 के विधानसभा चुनावों का प्रबंधन सुगमता से हो सके। मंडल स्तर पर भी परिवर्तन किए जाएंगे। जिस मंडल में 60-70 बूथ हैं, वहां नए मंडल बनाए जाएंगे। डॉ. जायसवाल ने कहा कि पार्टी का संगठन अधिक प्रभावी बनाने और इसके स्वरूप को धारदार बनाने के लिए विस्तृत चर्चा हो रही है।
इस नई व्यवस्था का उद्देश्य पार्टी को अधिक संगठित और चुनावी दृष्टिकोण से मजबूत बनाना है।
































