पटना: क्या बिहार में शिक्षक बहाली परीक्षा के दौरान बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित दूसरे फेज के पेपर लीक होने का मामला सामने आया है? यह सवाल अब सामने आ रहा है, क्योंकि इस मामले में बड़ा खुलासा हुआ है और इससे बिहार लोक सेवा आयोग पर एक बार फिर से सवाल उठने लगे हैं। चर्चा है कि इस पूरे घोटाले में तीन कोचिंग सेंटर के संचालक भी शामिल थे। आइए जानते हैं इस मामले का पूरा सच क्या है?

टीआरई-2 पेपर लीक का खुलासा

शिक्षक भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में ईओयू (आर्थिक अपराध इकाई) ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट में एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है, जिसके मुताबिक माफियाओं ने टीआरई-2 (ट्रेंड टीचर्स भर्ती परीक्षा-2) का पेपर भी लीक किया था। यह मामला सामने आने के बाद लोग हैरान रह गए कि आखिरकार इतना बड़ा घोटाला कैसे हुआ?

पेपर लीक कैसे हुआ?

सूत्रों के मुताबिक, टीआरई-2 का प्रश्नपत्र भोजपुर जिले के पिकअप चालक शिवकांत सिंह के जरिए लीक हुआ। दिसंबर महीने में परीक्षा से पहले शिवकांत और राहुल ने प्रश्नपत्र लेकर पटना से मोतिहारी जाने के लिए गाड़ी पकड़ी थी। जब गाड़ी सराय टोल टैक्स पर पहुंची, तो राहुल ने गाड़ी रुकवाई। इस दौरान एक स्कार्पियो और एल्ट्रोज कार आई, जिसमें 6-7 लोग उतरे। पिकअप से प्रश्नपत्र भरा बॉक्स उतारकर स्कार्पियो में रखा गया और पिकअप को वापस किया गया। इसके बाद शिवकांत और सुमित पेपर लेकर मुजफ्फरपुर से मोतिहारी डीएम ऑफिस की ओर निकल पड़े।

पेपर लीक के लिए 5 हजार रुपये में हुआ सौदा

शिवकांत ने पुलिस से कहा कि उसे पेपर लीक कराने के बदले राहुल ने ₹5000 दिए थे। वहीं, रामनिवास चौधरी ने भी स्वीकार किया कि दिसंबर 2023 में टीआरई-2 का प्रश्नपत्र ट्रांसपोर्टेशन के दौरान लीक किया गया था और इसके बदले उन्हें गाड़ी का भाड़ा और ₹8000 दिए गए थे। इसी तरह के लीक की घटना तीसरे फेज की परीक्षा में भी हुई थी। गौरतलब है कि टीआरई-2 की परीक्षा दिसंबर में हुई थी, जिसमें करीब 1.22 लाख उम्मीदवार सफल हुए थे।

पटना के वाहन चालक का अहम रोल

इस मामले का खुलासा तब हुआ जब ईओयू ने टीआरई-3 के पेपर लीक में शामिल एक आरोपी, जेनिथ लॉजिस्टिक के मुंशी राहुल के मोबाइल की जांच की। राहुल के मोबाइल से एक मोबाइल नंबर मिला, जो ‘पिकअप चोर चौधरी’ के नाम से सेव था। यह नंबर रामनिवास चौधरी का था, जो पिकअप वाहन का मालिक था और जिसने पेपर लीक के लिए गाड़ी की व्यवस्था की थी। इस काम के लिए वैन ड्राइवर रामभवन पासवान को ₹7000 दिए गए थे। पेपर लीक के मास्टरमाइंड संजीव मुखिया और उसके बेटे डॉ. शिव के बारे में भी खुलासा हुआ है।

डॉ. शिव की गिरफ्तारी और पेपर लीक नेटवर्क

डॉ. शिव, जो पहले सिपाही भर्ती पेपर लीक मामले में गिरफ्तार हो चुका था, अब इस पेपर लीक केस में भी आरोपी है। फिलहाल वह बेउर जेल में बंद है। जेल से उसने अपने साथियों को सबूत नष्ट करने के लिए फोन किए। करण नामक व्यक्ति ने राहुल का फोन फॉर्मेट करके सभी साक्ष्य डिलीट कर दिए थे। यह घटना 15 मार्च 2024 को हुई, जब टीआरई-3 की परीक्षा पहले ही पेपर लीक होने के कारण रद्द कर दी गई थी। बाद में जुलाई 2024 में पुनः परीक्षा आयोजित की गई।

ईओयू की गिरफ्तारी और जांच जारी

ईओयू ने अब तक 266 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। टीआरई-3 पेपर लीक में शामिल पटना के तीन कोचिंग सेंटर के संचालकों की तलाश जारी है। इन कोचिंग संस्थानों में प्रश्नपत्र सॉल्व कराए गए थे और संजीव मुखिया ने इन संस्थानों को पेपर उपलब्ध कराए थे। इस मामले में संजीव मुखिया के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का भी मामला दर्ज किया गया है।

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