नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक निर्णय में एससी/एसटी में में कोटा के अंदर कोटा को अपनी मंजूरी दे दी है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि कोटा में कोटा असमानता के खिलाफ नहीं है। 7 जजों की पीठ ने अपना निर्णय सुनाते हुए कहा कि राज्य सरकार SC/ST में सब कैटेगरी बना सकती है, जिससे जरूरतमंत कैटेगरी के लोगों को आरक्षण का ज्यादा फ़ायदा मिलेगा।
पंजाब में सिख और वाल्मिकी धार्मिक जातियों को 50 प्रतिशत अनुसूचित जाति आरक्षण प्रदान करने वाले कानून को 2010 में हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया था। हाई कोर्ट के निर्णय को चुनौती देते हुए SC में याचिका दाखिल की गई थी। गुरुवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए SC ने अहम निर्णय सुनाया। याचिका में कहा गया है कि SC/ST में कई अति पिछड़ी जातियां हैं और उन्हें सशक्त बनाने की जरूरत है. कोर्ट ने कहा कि जिन जातियों को आरक्षण का अलग हिस्सा दिया गया है, उनका पिछड़ापन साबित करना जरूरी है. शिक्षा और रोजगार में इन जातियों की उपस्थिति कम होने की वजह से इन्हें आरक्षण दिया जा सकता है। इसके लिए जातिगत आंकड़ों को आधार बनाना गलत है.
शीर्ष अदालत ने कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग में समानता नहीं हैं, उसमें कुछ जातियां ज्यादा पिछड़ी हुई हैं उन्हें मौका मिलना चाहिए। यह व्यवस्था अनुसूचित जाति के लिए भी लागू हो सकती है। कुछ अनुसूचित जातियों ने दूसरी अनूसूचित जातियों की तुलना में सदियों से ज्यादा भेदभाव को सहा है। कोर्ट ने कहा कि कोई राज्य अगर आरक्षण को वर्गीकृत करना चाहता है तो उसे पहले इससे जुड़े आंकड़े जुटाने होंगे।
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