Smart Meter
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पटना: स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं के लिए लाभदायक है। यह तकनीकी दृष्टि से उन्नत मीटर है, जो उपभोक्ताओं को कई फायदे देता है। इससे गलत बिजली बिल से छुटकारा मिलता है और बिजली की बचत में मदद होती है। इसलिए सरकार ने इसे अनिवार्य कर दिया है।अब पुराने मीटर वाले उपभोक्ताओं का कनेक्शन नहीं जारी रखा जाएगा। यह जानकारी जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने सोमवार को अपने कार्यालय में संवाददाताओं को दी।

स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर भ्रांतियाँ – डीएम

डीएम ने बताया कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर के बारे में कई गलतफहमियाँ फैलाई जा रही हैं। कहा जाता है कि स्मार्ट मीटर से बिल भुगतान पर लाभ नहीं मिलता, जबकि सच यह है कि बैलेंस खत्म होने से पहले रिचार्ज करने पर दो प्रतिशत और ऑनलाइन रिचार्ज पर एक प्रतिशत छूट मिलती है।

यह भी कहा जाता है कि औसत बिल आने की संभावना है, जबकि यह मीटर सटीक बिलिंग करता है और इससे दैनिक खपत की जानकारी मिलती है, जिससे बिजली की खपत कम की जा सकती है।

डीएम ने बताया कि यह भी मिथक है कि हर शिकायत के लिए बिजली ऑफिस जाना होगा, जबकि घर बैठे एप के जरिए शिकायतों का समाधान किया जा सकता है। यह मीटर बिजली खपत पर नियंत्रण में मदद करता है।

बिजली खपत पर नियंत्रण संभव

डीएम कुंदन कुमार ने कहा कि डिजिटलाइजेशन ने हमारे जीवन में बड़ा परिवर्तन लाया है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर उसी दिशा में एक कदम है, जो उपभोक्ताओं को अधिक सक्षम बनाता है। उपभोक्ता एप के माध्यम से साप्ताहिक और मासिक बिजली आपूर्ति की जानकारी ले सकते हैं और बिजली की खपत को नियंत्रित कर बचत कर सकते हैं।

स्मार्ट मीटर बिजली बिल का पूर्व सूचना देता है, जिससे उपभोक्ता अलर्ट हो जाते हैं और ऑनलाइन या एप के माध्यम से बिल जमा कर सकते हैं। उपभोक्ता कहीं से भी अपने घर का बिल चुका सकते हैं। रिचार्ज करने के बाद बिजली तुरंत बहाल होती है, और बिजली कटने से पहले रिचार्ज करने पर दो प्रतिशत छूट मिलती है।

डीएम ने बताया कि छह महीने या उससे अधिक का एकमुश्त रिचार्ज करने पर उपभोक्ताओं को बैंकों से अधिक ब्याज दिया जाएगा। तीन से छह महीने के एकमुश्त रिचार्ज पर सात प्रतिशत ब्याज मिलता है, और दो हजार रुपये से अधिक और कम से कम तीन महीने की बिजली खपत के बराबर रिचार्ज करने पर 6.75 प्रतिशत ब्याज मिलता है। डीएम ने उपभोक्ताओं से स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाकर विशेष ब्याज दरों का लाभ उठाने की अपील की।

डीएम ने कहा

डीएम ने कहा कि सामान्य मीटर और स्मार्ट मीटर में ऊर्जा गणना की प्रक्रिया में कोई अंतर नहीं है, लेकिन स्मार्ट मीटर में एक मोडेम होता है, जो सिम के माध्यम से दैनिक बिल को स्वचालित रूप से भेजता है, जिससे त्रुटि की संभावना कम होती है।

कोई शुल्क नहीं लिया जाता स्मार्ट मीटर के लिए

उन्होंने बताया कि फ्रांस की मल्टीनेशनल कंपनी मेसर्स ईडीएफ शहरी क्षेत्रों में मीटर लगाने का कार्य कर रही है। गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जीनस एवं एलएनटी कंपनियों के मीटर लगाए जा रहे हैं। स्मार्ट मीटर लगाने का कोई शुल्क उपभोक्ता से नहीं लिया जाता।

स्मार्ट प्रीपेड मीटर में दैनिक कटौती राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी के साथ की जाती है। डीएम ने कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर पूरी तरह से सुरक्षित और फायदेमंद है, इसलिए सरकार ने इसे सभी उपभोक्ताओं के घरों में लगाने का निर्देश दिया है। पुराने मीटर वाले कनेक्शन अब जारी नहीं रहेंगे, इसलिए सभी उपभोक्ता अपने घरों में स्मार्ट मीटर लगवाएं और स्मार्ट बनें।

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