पलामू: झारखंड में अफीम की खेती नष्ट करने के लिए एक विशाल अभियान चलाया जा रहा है। पहले इसका लक्ष्य 15 फरवरी तक पूरा करने का था, लेकिन अब इसे 15 मार्च तक बढ़ा दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने मिशन अरेस्ट शुरू कर दिया है, जिसमें अफीम की खेती से जुड़े लोगों और उनके नेटवर्क को रडार पर लिया गया है।
जनप्रतिनिधियों और पारा शिक्षकों पर शिकंजा
पलामू जिले में अफीम की खेती करने के आरोप में कई जनप्रतिनिधियों और पारा शिक्षकों पर मामले दर्ज किए गए हैं। लातेहार जिले में भी इस अवैध खेती से जुड़े दर्जनों लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने गिरफ्तारी अभियान तेज कर दिया है और दोषियों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
422 एकड़ से अधिक फसल नष्ट
अफीम उन्मूलन अभियान में सबसे अधिक कार्रवाई पलामू प्रमंडल के मनातू थाना क्षेत्र में की गई। यहां 300 एकड़ से ज्यादा अफीम की खेती नष्ट की गई। इसके अलावा, पांकी में 95 एकड़, छतरपुर में 15 एकड़, हुसैनाबाद में 6 एकड़ में लगी फसल को उखाड़ा गया। पूरे जिले में अब तक 422 एकड़ से अधिक फसल नष्ट की जा चुकी है।
लातेहार जिले में भी कार्रवाई जारी
लातेहार जिले में भी अफीम की कई एकड़ फसल नष्ट की गई। वहीं, पलामू के मनातू में एक पारा शिक्षक और एक मुखिया के खिलाफ अफीम की खेती करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज हुई है। इसके अलावा, पलामू से आधा दर्जन आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं।
सख्त निर्देश और छापेमारी अभियान
पुलिस को अफीम की खेती करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं। लोगों से अवैध खेती छोड़ने की अपील भी की जा रही है। इसके साथ ही इंटरस्टेट अभियान भी चलाया जा रहा है और कई अभियुक्तों की तलाश में पुलिस छापेमारी कर रही है।
नेटवर्क के सरगनाओं तक पहुंचना चुनौती
अफीम कारोबार से जुड़े मुख्य आरोपियों तक पहुंचना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। इस खेती के कई क्षेत्र जनसंख्या से दूर जंगलों या सरकारी जमीन (जीएम लैंड) पर हैं, जिससे असली जिम्मेदारों की पहचान करना मुश्किल हो रहा है। हरिहरगंज क्षेत्र में भी बटाईदारी के आधार पर की गई खेती पकड़ी गई है।



































