CM नीतीश कुमार
CM नीतीश कुमार

पटना: बिहार सरकार ने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए चौथी जांच एजेंसी की स्थापना कर दी है। पहले से काम कर रही तीन संस्थाओं के अलावा अब नीतीश सरकार ने मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय (CICD) का गठन किया है। यह नई एजेंसी कलेक्टर, एसपी, कमिश्नर और सचिव स्तर तक के अधिकारियों के भ्रष्टाचार की जांच करेगी। अगर किसी अधिकारी को दोषी पाया जाता है, तो उस पर त्वरित कार्रवाई भी की जा सकेगी।

पहले से मौजूद जांच एजेंसियां

बिहार में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के भ्रष्टाचार की जांच के लिए पहले से तीन प्रमुख एजेंसियां काम कर रही हैं:

1. स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU)2. इकोनॉमिक ऑफेंस यूनिट (EOU)

3. विजिलेंस इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (VIB)अब इन तीनों के बाद चौथी एजेंसी मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय (CICD) का गठन किया गया है।

कौन-कौन आएंगे जांच के दायरे में?

इस नई एजेंसी के तहत डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी, एसडीपीओ, डीएम, एसपी, कमिश्नर, संयुक्त सचिव, अपर सचिव, सचिव और सचिव से ऊपर के अधिकारी जांच के दायरे में होंगे। यह निदेशालय मुख्यमंत्री के अधीन सामान्य प्रशासन विभाग से संबद्ध रहेगा, जिसका नेतृत्व महानिदेशक एवं मुख्य जांच आयुक्त करेंगे।

मुख्य जांच आयुक्त का कार्यकाल

इस पद पर मुख्य सचिव स्तर के मौजूदा या रिटायर्ड अफसर को तैनात किया जाएगा। उनका कार्यकाल 5 साल या अधिकतम 70 वर्ष की उम्र तक होगा। इस निदेशालय में जांच आयुक्त, संयुक्त जांच आयुक्त, संयुक्त आयुक्त, अपर समाहर्ता विभागीय जांच जैसे महत्वपूर्ण पदों पर अफसरों की तैनाती होगी।

जांच की प्रक्रिया

सरकार ने स्पष्ट किया है कि किस स्तर के अधिकारी के खिलाफ किस एजेंसी को जांच करनी है। हालांकि, सरकार चाहे तो किसी भी मामले की जांच मुख्य जांच आयुक्त को सौंप सकती है।

किन अधिकारियों की होगी जांच?

मुख्य जांच आयुक्त उन अधिकारियों की जांच करेगा, जो वेतनमान 9 या उससे ऊपर के ग्रेड में आते हैं। इसमें डिप्टी कलेक्टर, डिप्टी एसपी, डीएम, एसपी और सचिव स्तर तक के अधिकारी शामिल हैं। इस निदेशालय को प्रमंडलीय स्तर पर संयुक्त जांच आयुक्त, जिला स्तर पर अपर समाहर्ता विभागीय जांच अधिकारी और सभी विभागों में संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी की मदद मिलेगी।

भ्रष्टाचार रोकने के लिए अहम कदम

सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि इस निदेशालय की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। अक्सर विभागीय जांच के बाद जब अफसरों पर कार्रवाई की जाती थी, तो कोर्ट में प्रक्रिया के अनुपालन में कमी के कारण उन्हें बचने का मौका मिल जाता था।

अब मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय (CICD) के जरिए भ्रष्टाचार की जांच पेशेवर तरीके से होगी। पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी, ताकि अदालत में भी इसे मजबूती से रखा जा सके और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जा सके।

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