पटना: बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन सदन के भीतर और बाहर सरकार की नीतियों को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए। स्मार्ट प्रीपेड मीटर के मुद्दे पर जहां प्रश्नकाल में जोरदार बहस हुई, वहीं सदन के बाहर रोजगार और भूमि सर्वे के मुद्दे छाए रहे।

सदन के बाहर विरोध प्रदर्शन

सत्र के अंतिम दिन सदन के भीतर विधायी कार्य शुरू होने से पहले ही राजद और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। राजद के सदस्य सुबह से विधानसभा पोर्टिको में जुटे और बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा में समान अवसर देने की मांग की। उन्होंने नारा लगाया, “तेजस्वी है तो नौकरी है”, और दावा किया कि तेजस्वी यादव के नेतृत्व में सबसे अधिक नौकरियां दी गई हैं।

भूमिहीनों के लिए जमीन की मांग

सदन के बाहर वाम दलों ने भूमि सर्वे का विरोध करते हुए भूमिहीन परिवारों को जमीन देने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारी नेताओं ने तख्तियों पर नारे लिखकर सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। उनका कहना था कि जो जहां बसा है, उसे वहीं जमीन दी जाए।

स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर भारी बहस

विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान स्मार्ट प्रीपेड मीटर का मुद्दा उठाया गया। भागलपुर के विधायक अजीत शर्मा ने कहा कि नवंबर 2023, मई 2024 और अक्टूबर 2024 में प्रीपेड मीटर के सर्वर फेल होने से उपभोक्ताओं को भारी-भरकम बिजली बिल चुकाना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि मीटर ठीक से टेस्ट किए बिना लगाए जा रहे हैं, जिससे तकनीकी खामियां बढ़ रही हैं। ऊर्जा मंत्री ने पलटवार करते हुए कहा, “जब आप सत्ता में थे, तब मीटर सही था, और अब विपक्ष में आकर समस्या नजर आ रही है। आप लिखकर बताइए, किस मीटर में खराबी है, हम जांच कराएंगे।” इसके बाद विपक्षी सदस्य वेल में जाकर नारेबाजी करने लगे, जिससे प्रश्नकाल अधूरा रह गया और सदन की कार्यवाही भोजनावकाश तक स्थगित करनी पड़ी।

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