पटना: आज, बुधवार (20 नवंबर) को बिहार में सक्षमता परीक्षा पास करने वाले 1 लाख 14 हजार 138 संविदा शिक्षकों को उनके नियुक्ति पत्र वितरण किए गए हैं। शिक्षा विभाग द्वारा पटना स्थित अधिवेशन हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शिक्षकों को नियुक्ति पत्र सौंपे। यह एक ऐतिहासिक मौका था जब मुख्यमंत्री ने बड़ी संख्या में शिक्षकों को सरकारी सेवा में शामिल किया।
शिक्षकों को आगे बढ़ाने की दिशा में काम- नीतीश
इस अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि वे हमेशा शिक्षकों की भलाई और उनकी प्रगति के लिए काम कर रहे हैं। अब 1.40 लाख संविदा शिक्षक सरकारी कर्मचारी बन चुके हैं। जिन शिक्षकों ने दूसरे चरण की सक्षमता परीक्षा पास की है, उन्हें भी शीघ्र नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, 65,000 से अधिक नियोजित शिक्षकों की बहाली जल्द विशिष्ट अध्यापक के तौर पर होगी। मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से यह भी कहा कि वे शपथ लें कि बच्चों को अच्छे से पढ़ाएंगे। उन्होंने 2005 से पहले के स्कूलों और शिक्षकों की स्थिति को याद करते हुए कहा कि उस समय बहुत कम शिक्षक थे, लेकिन उनकी सरकार ने विभिन्न योजनाओं जैसे पोशाक योजना और साइकिल योजना के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में सुधार किया।
ट्रांसफर-पोस्टिंग पर मुख्यमंत्री का बयान
मुख्यमंत्री ने ट्रांसफर और पोस्टिंग पर रोक को लेकर कहा कि जो शिक्षक जहां थे, वे वहीं रहेंगे, क्योंकि यह सबके हित में है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने हमेशा अपने काम को प्राथमिकता दी है और अपने पुराने साथियों के साथ ही काम करेंगे।
शिक्षक संघ में असहमति और समर्थन की स्थिति
हालांकि, इस नियुक्ति पत्र वितरण को लेकर शिक्षक संघों के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं। एक तरफ, कई शिक्षक संघ इस कदम का स्वागत कर रहे हैं, तो दूसरी ओर, कुछ शिक्षक संघ इसे लेकर विरोध जता रहे हैं। समर्थक शिक्षक संघ का कहना है कि सक्षमता परीक्षा के माध्यम से योग्य और दक्ष शिक्षकों को ही नियुक्ति मिल रही है, जिससे शिक्षा का स्तर सुधरेगा। उनके अनुसार, यह परीक्षा शिक्षकों की गुणवत्ता को परखने का एक उचित तरीका है और इससे छात्रों को बेहतर शिक्षा प्राप्त होगी।
सीतामढ़ी में विरोध प्रदर्शन
वहीं, मंगलवार शाम को सीतामढ़ी में नियोजित शिक्षकों ने नियुक्ति पत्र वितरण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने यह आरोप लगाया कि सरकार नियुक्ति पत्र में उनकी पुरानी सेवा का कोई उल्लेख नहीं कर रही है, जिससे उनके साथ अन्याय हो रहा है। उनका कहना है कि 20 वर्षों तक सेवा देने के बावजूद उनकी वरिष्ठता को नजरअंदाज किया जा रहा है।
सरकार की नीति पर सवाल
शिक्षकों ने सरकार के इस कदम को उनके प्रति अपमानजनक बताया और कहा कि सेवा निरंतरता का कोई उल्लेख न होना उनकी मेहनत और योगदान की अनदेखी करना है। इसके साथ ही, उन्होंने पोस्टिंग प्रक्रिया को अनुमंडल स्तर से हटाकर प्रखंड स्तर पर करने की मांग की।
शिक्षकों की अन्य मांगें
शिक्षकों ने स्कूलों के संचालन समय में बदलाव की भी मांग की, ताकि स्कूल केवल शाम 4 बजे तक ही चलें। शिक्षक संघ ने इसे सरकार की शिक्षक विरोधी नीति करार दिया और इस मुद्दे को लेकर कई पत्र भेजे थे, लेकिन सरकार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने भाषण में बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए सुधारों और भविष्य में किए जाने वाले प्रयासों का उल्लेख किया। हालांकि, शिक्षकों के बीच सेवा निरंतरता की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ असंतोष भी बना हुआ है।
































