पटना: पटना उच्च न्यायालय ने गुरुवार को राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया और आरक्षण अधिनियम में हालिया संशोधन की संवैधानिक वैधता को खारिज कर दिया। वहीं सरकार के कानून के खिलाफ लिखित याचिकाएं मंजूर कर ली गईं.
मुख्य न्यायाधीश के विनोद चंद्रन एवं न्यायाधीश हरीश कुमार की खंडपीठ ने विगत 11 मार्च को इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे गुरुवार को सुनाया गया।
याचिका में राज्य सरकार द्वारा 21 नवंबर, 2023 को पारित कानून को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत 65 प्रतिशत आरक्षण एससी, एसटी, ईबीसी और अन्य पिछड़ा वर्ग को आवंटित किए गए थे, जबकि सामान्य श्रेणी के केवल 35 प्रतिशत पद सिविल सेवा को आवंटित किए गए हैं। जिसमे उम्मीदवारों को ईडब्ल्यूएस के लिए 10% आरक्षण दिया जा सकता है।
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