महापर्व छठ की भव्य प्रस्तुति

पटना डेस्क: बिहार के रोहतास जिले से छह शिक्षकों का चयन संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन सेंटर फॉर कल्चरल रिसोर्सेज एंड ट्रेनिंग द्वारा आयोजित 517वें राष्ट्रीय ओरिएंटेशन कोर्स के लिए हुआ है। प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को भारतीय कला, संस्कृति, लोक परंपराओं और नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों से जोड़ना है, ताकि वे इन अनुभवों का लाभ विद्यालयों में विद्यार्थियों तक पहुंचा सकें। राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीइआरटी) पटना के निर्देश पर रोहतास जिले के छह शिक्षक-शिक्षिकाओं का चयन किया गया है।

राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में 16 राज्यों के शिक्षक
गुवाहाटी स्थित श्रीमंत शंकरदेव कला क्षेत्र में आयोजित सीसीआरटी के 517वें राष्ट्रीय अनुस्थापन पाठ्यक्रम के दौरान बिहार की टीम ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ छठ महापर्व का आयोजन किया। इस सांस्कृतिक प्रस्तुति ने देशभर से पहुंचे प्रतिभागियों का ध्यान आकर्षित किया और उन्हें बिहार की लोकपरंपरा, आस्था और सांस्कृतिक मूल्यों से परिचित कराया। 22 जुलाई से 11 अगस्त 2026 तक आयोजित इस राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के 16 राज्यों के चयनित शिक्षक भाग लेने पहुंचे हैं।

जयनाथ शर्मा ने सोहर गाकर किया मंत्रमुग्ध
बिहारी शिक्षकों ने सांस्कृतिक प्रस्तुति की शुरुआत बिहार गीत से की। प्रस्तुति के दौरान शिक्षकों ने बिहार के समस्त सांस्कृतिक विरासत की जानकारी दी। वहीं शिक्षक जयनाथ शर्मा ने लोक गीत (सोहर) गाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके साथ ही बिहार टूरिज्म के बाद अंत में बिहार की भव्य संस्कृति को दर्शाने वाले पारंपरिक रीति रिवाजों के साथ छठ महापर्व की भव्य प्रस्तुति ने खूब सुर्खियां बटोरी।

रोहतास जिले के चयनित शिक्षकों का परिचय
रोहतास से चयनित शिक्षकों में उच्च माध्यमिक विद्यालय कदवा, नोखा की सोनी वर्षा, संत शिवानंद एकेडमी प्लस टू विद्यालय, सासाराम के जयनाथ शर्मा, प्रोजेक्ट बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, नासरीगंज के आलोक राज, उत्क्रमित उच्च विद्यालय, रकसियां (मोकर) के सोनू कुमार, रैयत उत्क्रमित मध्य विद्यालय, लहुआरा के रामविलास चेरो और उच्च माध्यमिक विद्यालय, तेलकप के सोनू कुमार शामिल हैं। प्रतिभागी शिक्षकों ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें भारतीय कला, संस्कृति और आधुनिक शिक्षण तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो रहा है। लिहाजा विद्यालय लौटने के बाद विद्यार्थियों को नवाचार आधारित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में काफी मदद मिलेगी।

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