पटना: बिहार में भूमि सर्वेक्षण के दौरान भूमि मालिकों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। लेकिन शिवहर के जिलाधिकारी ने इन समस्याओं का समाधान किया है।
भूमि विवादों का प्राथमिकता से निपटारा
जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय ने भूमि विवादों के निपटारे के लिए प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई का निर्देश दिया। उन्होंने अधिकारियों को नियमित रूप से सुनवाई करने का आदेश दिया।
समाहरणालय में हुई बैठक में, जिलाधिकारी ने जन शिकायतों, भूमि विवादों और अभियोजन से संबंधित मामलों की समीक्षा की। उन्होंने प्रत्येक शनिवार को थाना स्तर पर कैम्प आयोजित कर अधिक से अधिक भूमि विवादों का समाधान करने की बात कही।
एसडीओ और एसडीपीओ को दिशा-निर्देश
एसडीओ और एसडीपीओ को त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निपटारे के लिए निर्देशित किया गया। इसके अलावा, उन्होंने जिला स्तर पर जनता दरबार में प्राप्त आवेदनों पर तेजी से कार्रवाई करने के लिए संबंधित अधिकारियों को आदेश दिए।
सभी अंचलाधिकारियों को लंबित मामलों की जानकारी प्राप्त करने और अधिक से अधिक मामलों के निपटारे के लिए जिला अभियोजन पदाधिकारी एवं अपर लोक अभियोजक के माध्यम से निर्देशित किया गया। बैठक में एडीएम अनिल कुमार, एएसपी प्रेमचंद्र सिंह, और एसडीपीओ अनिल कुमार भी उपस्थित थे।
कैथी लिपि का सरल परिचय
कैथी लिपि में खतियान के कारण पढ़ने में कठिनाई हो रही है। इसे ब्राह्मी लिपि से विकसित माना जाता है और इसका प्रयोग 600 साल पहले शुरू हुआ। मुस्लिम शासकों के समय में कायस्थ समुदाय के लोग भूमि से जुड़े दस्तावेज कैथी में लिखते थे, जबकि मुस्लिम उर्दू-फारसी में लिखते थे।
अंग्रेजी शासन काल से आजादी के बाद तक भी जमीनी दस्तावेजों का लेखन कैथी में जारी रहा। इसमें अक्षरों के ऊपर शिरोरेखा नहीं होती और सभी अक्षर एक साथ लिखे जाते हैं। इसमें हर्स्व “इ” और दीर्घ “ऊ” की मात्रा नहीं होती। संयुक्त अक्षरों का उपयोग भी नहीं होता, जिसके कारण इसे पढ़ना कठिन हो गया है।



































