पटना: इस साल जनवरी में जब बिहार में जेडीयू-बीजेपी सरकार का गठन हुआ, तब आरजेडी के नेताओं ने विधायकों की खरीद-फरोख्त की कोशिश की थी। इस संदर्भ में बड़ी मात्रा में पैसे का खेल हुआ। बिहार सरकार की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) द्वारा विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त की जांच में यह पुष्टि हुई है कि वित्तीय लेन-देन हुआ है।

जांच ईडी को सौंपी गई

EOU के डीआईजी मानवजीत सिंह ढिल्लो ने मीडिया से कहा कि कोतवाली थाने में दर्ज मामले की जांच EOU को सौंपी गई थी। उनकी प्रारंभिक रिपोर्ट में मनी लॉंड्रिंग और पैसे के लेन-देन का मामला सामने आया है। इसीलिए ईडी को इसकी जानकारी दी गई है, जो आगे की जांच करेगी।

डीआईजी ने कहा कि कई लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं, लेकिन जांच अभी जारी है और इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी जा सकती। जब जांच पूरी होगी, तब सभी तथ्य साझा किए जाएंगे।

तेजस्वी के करीबी लोगों पर गिरेगी गाज

सूत्रों के अनुसार, इस मामले में तेजस्वी यादव के दो करीबी आरजेडी नेताओं पर जल्द कार्रवाई की जा सकती है। EOU सूत्रों ने बताया कि विधायकों को पैसे देने के ठोस सबूत मिले हैं और इसमें विदेश से पैसे मंगवाने का भी मामला सामने आया है। एक ठेकेदार, जो तेजस्वी के करीबी माने जाते हैं, ने इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सूत्रों का कहना है कि एनडीए सरकार को गिराने के लिए विधायकों को पैसे का लालच दिया गया था और विपक्ष द्वारा उन्हें अपने पक्ष में करने की योजना थी। हॉर्स ट्रेडिंग में शामिल विधायकों को हवाला के जरिए पैसे दिए जाने थे, कुछ को अग्रिम राशि भी दी गई थी, जबकि बाकी रकम सरकार गिरने के बाद मिलने वाली थी। जांच में यह भी सामने आया है कि झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल से पैसे मंगवाकर विधायकों को खरीदने का प्रयास किया गया।

इस साल जनवरी में नीतीश कुमार ने आरजेडी से अलग होकर बीजेपी का साथ दिया था, जिसके बाद बिहार में एनडीए सरकार का गठन हुआ। इस दौरान कई विधायकों ने अपने पाले बदले। नई सरकार बनने के समय जेडीयू के विधायक सुधांशु शेखर ने पटना के कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि जेडीयू के ही एक विधायक के माध्यम से एनडीए विधायकों को खरीदने की कोशिश की जा रही है, जिसमें तेजस्वी यादव के करीबी शामिल हैं।

सुधांशु शेखर ने कहा कि पैसे के बल पर सरकार गिराने की कोशिश में दस लोग शामिल थे, और विधायकों को पैसे और पद देने का प्रलोभन दिया गया था। उन्हें झारखंड ले जाकर वहां रखा जाने की योजना थी, जहां कमरों की बुकिंग भी कराई गई थी।

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