पटना: विशेष भूमि सर्वेक्षण के तहत जमीन से संबंधित कागजात जुटाने के लिए समय बढ़ाने का रास्ता खुलता दिखाई दे रहा है। इस संदर्भ में बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त नियमावली, 2012 के नियम 3 (1) में संशोधन का एक प्रारूप तैयार किया जा रहा है। वर्तमान में यह मुद्दा केवल नई समय सीमा को लेकर अटका हुआ है।
विभागीय मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने पिछले सप्ताह संकेत दिया था कि रैयतों को कागजात एकत्र करने के लिए तीन महीने का समय दिया जाएगा। हालांकि, विभाग में इस पर चर्चा चल रही है कि इसे चार या साढ़े चार महीने तक बढ़ा दिया जाए। यह मान्यता है कि यदि स्वघोषणा पत्र से संबंधित विवाद का समाधान हो जाता है, तो सर्वेक्षण का कार्य तेजी से आगे बढ़ सकेगा। इसे अब तक की सबसे बड़ी बाधा माना गया है।
नियमावलीq का क्या है विवरण?
वर्तमान में, बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त नियमावली, 2012 के नियम 3 (1) के तहत स्वघोषणा पत्र जमा किया जा रहा है। इसके अनुसार, अधिसूचना की तारीख से 30 कार्य दिवसों के भीतर स्वघोषणा प्रस्तुत करनी होती है, जबकि विशेष परिस्थितियों में इसे 15 कार्य दिवस तक बढ़ाया जा सकता है। वर्तमान में स्वघोषणा के सत्यापन के लिए अधिकतम 15 कार्य दिवस का समय निर्धारित है, जिसका मतलब है कि कुल मिलाकर 45 दिन का समय दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री की मंजूरी आवश्यक
विभागीय सूत्रों के अनुसार, नियमावली में संशोधन का प्रारूप मुख्यमंत्री कार्यालय की सहमति पर निर्भर करेगा, क्योंकि विशेष भूमि सर्वेक्षण मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का एक प्रमुख अभियान है और वे इस पर गहरी नजर रखते हैं।
यह भी महत्वपूर्ण है कि स्वघोषणा के लिए अधिक समय देने से सर्वेक्षण की समय सीमा प्रभावित न हो। विभाग का लक्ष्य 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले सर्वेक्षण पूरा करने का है, और नीतीश कुमार ने इस दिशा में कई बार संकेत दिए हैं।
कैबिनेट की स्वीकृति भी आवश्यक
नियमावली में संशोधन केवल कार्यपालक आदेश से नहीं होगा। इसे राज्य कैबिनेट की स्वीकृति की आवश्यकता होगी। विभाग का प्रयास है कि संशोधन का प्रारूप जल्द से जल्द तैयार हो और इसे कैबिनेट की अगली बैठक में मंजूरी के लिए पेश किया जाए।



































