पटना: बिहार में भूमि म्यूटेशन से संबंधित दाखिल-खारिज के मामले 75 दिनों से अधिक समय से लंबित हैं, जिनमें सबसे अधिक मामले सदर अंचल में हैं। इसके अलावा संपतचक, बिहटा, फुलवारीशरीफ और धनरुआ में भी हजारों आवेदन फंसे हुए हैं। इस स्थिति में सुधार लाने के लिए जिलाधिकारी डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने संबंधित अंचल अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्राप्त आवेदनों की तुलना में निष्पादन की गति को तेज किया जाए ताकि बैकलॉग को शीघ्र समाप्त किया जा सके। डीएम सोमवार को राजस्व मामलों की समीक्षा कर रहे थे।
आम जनता को हो रही असुविधा
डीसीएलआर और अंचल अधिकारियों के साथ बैठक में डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि दाखिल-खारिज और परिमार्जन की प्रक्रियाओं में लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जो कि एक सकारात्मक स्थिति नहीं है। वर्तमान में दाखिल-खारिज के 57,582 मामले लंबित हैं, जिनमें से 22,351 आवेदन 35 दिनों से अधिक समय से और 32,029 आवेदन 75 दिनों से अधिक समय से लंबित हैं। हालांकि, पिछले आठ दिनों में चार हजार से अधिक मामलों का निष्पादन किए जाने की सराहना भी की गई है।
अस्वीकृत मामलों पर विशेष ध्यान
डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने डीसीएलआर को निर्देश दिया कि दाखिल-खारिज और भूमि विवाद निराकरण अधिनियम के तहत मामलों का विधिवत निष्पादन समय-सीमा के भीतर किया जाए। विशेष रूप से, 90 दिनों से अधिक समय से लंबित अतिक्रमण के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर हल करने का निर्देश दिया गया है। जिन अंचलों में अधिक मामलों को अस्वीकृत किया गया है, उन पर भी डीसीएलआर रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि शिथिलता और अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी। बेहतर प्रदर्शन करने वाले सीओ को प्रशस्ति पत्र मिलेगा, जबकि खराब प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बैठक में अपर समाहर्ता, सभी भूमि सुधार उप समाहर्ता, अंचलाधिकारी और अन्य अधिकारी भी शामिल थे।
ALSO READ
राहुल गांधी का अमेरिका में पीएम मोदी पर वार, 56 इंच का सीना अब इतिहास..
































