पटना: रेलवे भर्ती बोर्ड के जीडीसीई का पर्चा लीक होने के मामले में सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच ने कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। इस खुलासे के बाद रेलवे भर्ती बोर्ड में हर कोई हैरान नजर आ रहा है। इसका कारण यह है कि इस पर्चा लीक में शामिल होने वाला कोई आम कर्मचारी नहीं बल्कि बोर्ड का सुप्रीम पावर यानी खुद के बोर्ड के चेरयरमैन हैं।
वहीं अब इस मामले में रेलवे के चार कर्मचारियों समेत करीब 1 दर्जन लोगों की तलाश की जा रही है। CBI के अनुसार नियमानुसार 2 भाषाओं में पर्चा तैयार किया जाता है। पर चेयरमैन राजेश कुमार ने सिर्फ अंग्रेजी में ही पर्चा बनाया। यह पर्चा अपटेक संस्था के पास भेजा गया जहां अपटेक की गोपनीय टीम ने पर्चे को हिन्दी में अनुवाद किया। इसके बाद ही पर्चा परीक्षा केन्द्रों के लिए छह अगस्त, 2021 की सुबह रवाना किया गया। हालांकि इससे एक दिन पहले पर्चा लीक किया जा चुका था।
इसके अलावा CBI की जांच में इसका भी खुलासा हुआ है कि इंटरनल लेवल इग्जाम में अभ्यर्थी बलराम मीना व शिव कुमार को 100 नम्बर के पर्चे में 94 अंक मिले थे। इसे क्वालीफाई करने के लिए सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को 40, पिछड़ी व अनुसूचित जाति के अभ्यर्थियों को 30 और अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों को 25 अंक लाने जरूरी होते हैं। इसके बाद भी रिजल्ट में बलराम व शिव कुमार को फेल दिखा दिया गया था। जांच में यह भी पता चला कि कुछ स्थानों पर रेलवे के कर्मचारी भी अभ्यर्थी बनकर बैठे थे। इन्होंने कुछ लोगों के लिये साल्वर का भी काम किया था। इस दौरान ही दो लोगों भूप सिंह और जितेन्द्र मीना ने पर्चा पाने के लिए रेलवे में तैनात प्रशांत मीना से सम्पर्क किया था। प्रशांत मीना ने रुपये ले लिए थे लेकिन वह परीक्षा में शामिल नहीं हुआ था। भूप व जितेन्द्र बाहरी लोग थे। इनके बारे में अभी तक कुछ पता नहीं लगा है।
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