पटना: बिहार के सरकारी स्कूलों में एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है. राज्य के अंदर सरकारी स्कूलों में मिड डे मिल की आड़ में बड़ा घोटाला किया गया। जो अब साफ़ हो गया है. इसके तहत राज्य के अंदर कई सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन खानेवाले बच्चों की संख्या बढ़ाकर सरकारी पैसों की लूट का खुलासा हुआ है। इसके बाद ऐसे 46 प्रधानाध्यापकों की पहचान की गयी है। जिन्होंने स्कूलों में मध्याह्न भोजन खानेवाले बच्चों की संख्या बढ़ाकर दिखाया है।
वहीं, शिक्षा विभाग ने अब इन प्रबंधकों से यह रकम वापस मांगने का फैसला किया है. विभाग के मुताबिक विभाग ने 46 स्कूल प्रधानाध्यापकों से कुल 16 लाख रुपये वसूलने की योजना बनाई है. दरअसल, शिक्षा विभाग द्वारा स्थापित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को शिकायत मिली थी कि स्कूलों में मध्याह्न भोजन खानेवाले बच्चे काफी कम रहते हैं, पर इनकी संख्या को बढ़ाकर रिपोर्ट तैयार की जाती है। इसके बाद निदेशालय ने संबंधित जिलों के पदाधिकारियों को भेजकर स्कूलों में औचक जांच करायी और जांच के दौरान यह बातें सही पाई गई। उसके बाद अब एक्शन लिया गया है।
बता दें बताया जा रहा है कि, शिक्षा विभाग में बने कमांड एंड कंट्रोल सेंटर पर अलग -अलग जगहों से शिकायतें आई थीं। उसके बाद विभाग के आदेश पर मध्याह्न भोजन योजना निदेशालय ने इसकी जांच कराई तो कई शिकायतें सही पायी गयीं। सबसे बड़ी बात है कि कमांड एंड कंट्रोल सेंटर में कुल 997 शिकायतें मध्याह्न भोजन से संबंधित आईं।
इसके बाद विभागीय जांच में पता चला कि स्कूल संचालकों ने बच्चों की वास्तविक संख्या में हेराफेरी की। जितने बच्चों खाना खिलाया गया उससे ज्यादा की रिपोर्ट भेजी गयी। इस दौरान 42 स्कूलों के हेडमास्टर की पहचान की गई। हालाँकि, कुछ अन्य मामलों में 27 स्कूल प्रिंसिपलों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई। जानकारी के लिए बता दें कि बिहार में एमडीएम की गुणवत्ता की वजह से सरकारी स्कूल अक्सर चर्चा में बने रहते हैं। शिक्षा विभाग के पास भारी संख्या में आ रही शिकायतों के बाद अब विभाग ने भी मिड डे मिल को लेकर सख्ती बढ़ा दी है।
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