नई दिल्ली: हरियाणा में भाजपा ने लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी कर एक नया इतिहास रचा है। यह 1972 के बाद पहला मौका है जब कोई पार्टी राज्य में लगातार तीसरी बार जीत हासिल कर रही है। इस बार भाजपा ने 48 सीटों पर विजय प्राप्त की, जो उसकी हरियाणा में अब तक की सबसे बड़ी जीत है। 2014 में भाजपा ने 47 और 2019 में 40 सीटें जीती थीं।

पीडीपी को बड़ा झटका

जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के गठबंधन ने 49 सीटें जीतकर महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। हालांकि, भाजपा ने 2014 के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करते हुए 29 सीटें जीती, जबकि 2014 में उसे केवल 25 सीटें मिली थीं। महबूबा मुफ्ती की पीडीपी को सबसे बड़ा झटका लगा है, जिसने सिर्फ तीन सीटें जीतीं, जबकि 2014 में उसे 28 सीटें मिली थीं।

मुख्यमंत्री की स्थिति स्पष्ट

दोनों राज्यों के चुनाव परिणामों ने कई दलों के लिए चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है, लेकिन मुख्यमंत्री पद के लिए स्थिति स्पष्ट हो गई है। हरियाणा में नायाब सिंह सैनी का पुनः मुख्यमंत्री बनना तय है, वहीं जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला के मुख्यमंत्री बनने की संभावना है। कांग्रेस के लिए इन दोनों राज्यों के परिणाम निराशाजनक रहे हैं, विशेषकर लोकसभा चुनाव के बाद।

कांग्रेस में अंतर्कलह

हरियाणा में कांग्रेस की सत्ता में वापसी की उम्मीदों को झटका लगा है। पार्टी अपनी हार को स्वीकार करने को तैयार नहीं है। अंदरूनी खींचतान और अतिआत्मविश्वास को हार का मुख्य कारण माना जा रहा है। चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री पद के लिए नेताओं के बीच विवाद भी हार में एक महत्वपूर्ण कारण रहा। हालांकि, कांग्रेस ने पहले के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करते हुए 37 सीटें जीतीं, जबकि 2019 में उसे 31 सीटें मिली थीं।

केंद्र पर निर्भरता

जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस का गठबंधन भले ही सत्ता में आया है, कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर रहा। पार्टी ने केवल छह सीटें जीतीं। नई सरकार को विकास के लिए केंद्र के साथ तालमेल बनाए रखना होगा, क्योंकि यह केंद्रशासित प्रदेश है।

भाजपा और कांग्रेस के बीच प्रतिस्पर्धा

हरियाणा में भाजपा ने भले ही जीत हासिल की हो, लेकिन वोट प्रतिशत में कांग्रेस के साथ प्रतिस्पर्धा कड़ी रही। भाजपा को 39.90% और कांग्रेस को 39.10% वोट मिले, जबकि भाजपा ने 49 और कांग्रेस ने 37 सीटें जीतीं। इनेलो को केवल दो सीटें मिलीं।

जम्मू-कश्मीर में रोचक चुनाव

जम्मू-कश्मीर में मतगणना के बाद भाजपा ने 25.60% वोटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनने का दावा किया, लेकिन सीटों के मामले में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 42 सीटें जीतीं। भाजपा ने 29 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस और पीडीपी को क्रमशः 12% और 9% वोट मिले।

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