न्यूज़ डेस्क, पटनाः पूरे विश्व में आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दौर है। ऐसा लग रहा है कि एआई के बिना अब काम आसान नहीं होगा। AI के प्रतिस्पर्धा की भाग दौड़ में हम भी पीछे नहीं रहना चाहते, लिहाजा बिहार सरकार ने इस दिशा में एक अच्छी पहल की है। बिहार के छात्रों को विज्ञान, तकनीक और कौशल विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बड़ा कदम उठाते हुए नीतीश सरकार ने राज्य के सभी 38 सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित कोर्स अनिवार्य करने का फैसला किया है। ताकि बिहारी छात्रों को तकनीकी दक्षता और रोजगार क्षमता को बढ़ाया जा सके।
56 एआई आधारित कोर्स को मंजूरी
बिहार टेक्निकल यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक डॉ. बिजेंद्र कुमार के अनुसार विगत 22 जनवरी को यूनिवर्सिटी और नैसकॉम (NASSCOM) के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हुए थे। नैसकॉम के पास एआई से जुड़े 400 से अधिक कोर्स उपलब्ध हैं, जिनमें से बिहार के लिए 56 एआई आधारित कोर्स को मंजूरी दी गई है। डॉ. बिजेंद्र कुमार ने कहा कि सिविल, मैकेनिकल समेत सभी इंजीनियरिंग शाखाओं के छात्रों के लिए एआई कोर्स करना अनिवार्य होगा। इसके लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और सभी 38 सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में ये कोर्स निःशुल्क कराए जाएंगे।
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सर्टिफिकेट कोर्स के रूप में मान्यता
आपको बता दें कि फिलहाल नैसकॉम की ओर से इन सभी कोर्स को सर्टिफिकेट कोसर्स के रूप में मान्यता दी गई है। हालांकि, विश्वविद्यालय की योजना है कि भविष्य में इन्हें क्रेडिट सिस्टम से जोड़ा जाए और ऑफलाइन मोड में नियमित कक्षा शिक्षण के रूप में शुरू किया जाए।
56 एआई कोर्स पूरी तरह ऑनलाइन
बिहार के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में उपलब्ध कराए जा रहे 56 एआई कोर्स पूरी तरह ऑनलाइन होंगे। कुछ कोर्स 40 घंटे के हैं, जबकि कुछ 200 घंटे से अधिक के। कोर्स पूरा करने के बाद छात्रों को प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा, जिससे उन्हें उच्च शिक्षा और रोजगार में लाभ मिल सकेगा।
AI कोर्सः समय और बाजार की मांग
बिहार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि तकनीकी शिक्षा में नवाचार को ध्यान में रखते हुए एआई आधारित कोर्स अनिवार्य किए गए हैं। शिक्षा मंत्री का कहना है कि नैसकॉम के साथ हुए करार से छात्रों की शिक्षा को समय और बाजार की मांग के अनुरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।



































