नई दिल्ली: भारत में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने एक अहम और गंभीर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक अब एक व्यवसाय जैसा बन गया है और यह एक गंभीर समस्या बन चुकी है, जिस पर तुरंत रोक लगाने की आवश्यकता है।

पेपर लीक एक व्यापार बन चुका है, इसे रोकना होगा

उपराष्ट्रपति ने कहा, “अगर पेपर लीक होते हैं तो चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता का कोई मतलब नहीं रह जाता। यह एक ऐसा अपराध है, जो अब एक तरह का उद्योग बन चुका है, एक व्यापार की तरह चल रहा है। यह एक बुराई है, जिस पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।” उनके अनुसार, यह प्रथा शिक्षा और परीक्षा के पूरे सिस्टम को नुकसान पहुंचा रही है।

छात्रों के लिए एक बड़ा झटका है पेपर लीक

धनखड़ ने कहा कि जब छात्र महीनों तक कड़ी मेहनत और तैयारी करते हैं, और फिर पेपर लीक हो जाता है, तो यह उनके लिए बेहद निराशाजनक और अपमानजनक स्थिति पैदा करता है। इसके कारण छात्रों को जो मानसिक आघात होता है, वह उन्हें लंबे समय तक प्रभावित करता है। उपराष्ट्रपति ने इस मुद्दे को गंभीर रूप से उठाते हुए कहा कि छात्रों का विश्वास प्रणाली पर से उठ सकता है और इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है।

सार्वजनिक परीक्षा विधेयक 2024 की सराहना

उपराष्ट्रपति ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक, 2024 की सराहना की। उन्होंने इसे एक सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि इससे परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता लाई जा सकती है। यह विधेयक पेपर लीक और अन्य अनैतिक साधनों पर काबू पाने के लिए एक मजबूत कदम साबित हो सकता है।

छात्रों को दो डर का सामना करना पड़ता है

हालांकि, उपराष्ट्रपति ने चिंता जताई कि अब छात्रों को दो तरह के डर का सामना करना पड़ रहा है। पहला डर परीक्षा के परिणाम को लेकर है, और दूसरा डर यह है कि कहीं उनका पेपर लीक न हो जाए। इस तरह के डर से छात्र मानसिक दबाव में रहते हैं, जिससे उनकी तैयारी पर भी असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि छात्रों को सिर्फ परीक्षा के लिए डर महसूस हो, पेपर लीक के डर से नहीं।

पेपर लीक की समस्या का समाधान करना बेहद जरूरी

धनखड़ ने अंत में यह भी कहा कि पेपर लीक की समस्या को जल्द से जल्द हल करना जरूरी है, ताकि छात्रों के प्रयासों का सम्मान किया जा सके और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया जा सके। उनका मानना है कि इस दिशा में सरकार को कड़ी कदम उठाने होंगे ताकि यह बुराई पूरी तरह से खत्म हो सके।

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का यह बयान देश में बढ़ते पेपर लीक मामलों के बीच आया है, जो शिक्षा प्रणाली के लिए एक गंभीर खतरा है। उनकी चिंता यह है कि इस तरह के अपराधों से न सिर्फ छात्रों के सपने टूटते हैं, बल्कि देश की परीक्षा प्रणाली की साख भी धूमिल होती है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस पर कैसे कार्रवाई करती है और क्या सार्वजनिक परीक्षा विधेयक 2024 इस समस्या के समाधान में मददगार साबित होता है।

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