पटना: राज्य के अंचलों में सरकारी भूमि की अवैध जमाबंदी का मामला सामने आया है, जिसमें बिचौलिए और अंचल के कर्मियों एवं अधिकारियों की संलिप्तता पाई गई है। हाल ही में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव ने भूमि से जुड़े विभिन्न मामलों की समीक्षा की, जिसके दौरान यह जानकारी उजागर हुई। उन्होंने सभी अपर समाहर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी और जांच के आदेश दिए।
अपर मुख्य सचिव ने बताया कि अंचलों में सरकारी भूमि की गलत जमाबंदी नियमों के विरुद्ध है और इसमें कर्मियों तथा अधिकारियों की मिलीभगत हो सकती है।
सेवानिवृत्त अधिकारियों पर कार्रवाई
यह भी आशंका जताई गई है कि कई कर्मी और अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके होंगे। उन्हें चिन्हित कर प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, यदि वर्तमान कर्मियों और अधिकारियों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनसे स्पष्टीकरण मांगकर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सभी जिलों में गलत जमाबंदी की जांच शुरू कर दी गई है और अंचल स्तर पर रिपोर्ट तलब की गई है।
गलत जमाबंदी होगी रद्द
जांच के दौरान यदि सरकारी भूमि की गलत जमाबंदी पाई जाती है, तो उसे रद्द किया जाएगा। यह भी पता लगाया जाएगा कि जमाबंदी किसके नाम पर हुई और किस समय में। मुख्यालय को विस्तृत रिपोर्ट भेजने के लिए कहा गया है। समीक्षा में यह भी सामने आया कि जमाबंदी सत्यापन का कार्य अंचलाधिकारी और राजस्व कर्मचारियों के स्तर पर लंबित पड़ा है। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी अंचलों में जमाबंदी की मूल पंजी के साथ डिजिटाइज्ड कॉपी का मिलान कर प्रक्रिया को तेज किया जाए।
इसके साथ ही, अभियान बसेरा-2 की समीक्षा के दौरान भी अनियमितताएं पाई गईं, जिसमें सूची से बाहर के लोगों को पर्चा बांटे जाने की बात सामने आई। इसे निर्देशों की अवहेलना मानते हुए इस मामले में भी जांच के आदेश दिए गए हैं।
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