पटना: पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के खिलाफ सोमवार को एक परिवाद दाखिल किया गया है, जिसमें उन पर दुष्कर्म मामले को लेकर बिहार का आपत्तिजनक तरीके से उल्लेख करने का आरोप लगाया गया है। यह परिवाद अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने प्रस्तुत किया है। अदालत ने इसे सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है, और अगली सुनवाई 24 अक्टूबर को होगी।
बता दें कि लालू यादव ने रविवार को एक ट्वीट किया था। जिसमें उन्होंने प्रदेश में हुए दुष्कर्म के कई मामलों को उजागर किया था। इसके साथ, उन्होंने अपने में ऐसा कुछ कैप्शन लिख दिया जिसकी वजह से बिहार की सियासत में भूचाल मच गया है।

इस कैप्शन को लेकर जदयू ने भी लालू यादव को घेरा। जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने रविवार को कहा कि राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने दुष्कर्म शब्द से बिहार की तुलना कर प्रदेश की जनभावना को ठेस पहुंचाया है। राजद प्रमुख ने अपने एक्स हैंडल पर जो लिखा, वह बिहार की संस्कृति और अस्मिता पर सीधा हमला है।
जदयू नेता ने क्या कहा?
उन्होंने आगे कहा कि लालू के पोस्ट ने पूरे प्रदेश को शर्मसार किया है। उन्होंने कहा कि लालू-राबड़ी के शासनकाल में सत्ता संरक्षित अपराधियों का इतना खौफ था कि प्रदेश की महिलाएं अपने घर के चौखट के आगे कदम भी नहीं रखती थी। उमेश ने कहा कि मौजूदा कानून-व्यवस्था के संबंध में किसी भी तरह का वक्तव्य देने से पहले लालू एंड फैमिली को अपने कार्यकाल का इतिहास जरूर पलटना चाहिए। जदयू प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में किए गए कार्यों का ही यह नतीजा है कि आज बिहार की बेटियां खौफ के वातावरण से निकलकर पुलिस की वर्दी में समाज की रक्षा कर रही है। सुशासन पर फर्जी उपदेश देने से पहले राजद को आईना जरूर देखना चाहिए।
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