पटना: बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा के पेपर लीक का मामला एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में इस मामले में सबसे बड़ी गिरफ्तारी संजीव मुखिया के बेटे डॉ. शिव की हुई है। डॉ. शिव बिहार के प्रमुख मेडिकल कॉलेज में 2015-2021 बैच के छात्र हैं। उसने अपनी चार्जशीट में कुछ चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
डॉ. शिव ने बताया कि उसकी मां ने 2020 में नालंदा के हरनौत विधानसभा क्षेत्र से सीएम नीतीश कुमार के गृह जिले में चुनाव लड़ा था। उसकी मां को लोजपा की ओर से टिकट मिला था, लेकिन वह चुनाव हार गई। इस चुनाव में लगभग 5 करोड़ रुपए खर्च हुए थे, जिन्हें वापस लाने का दबाव था। डॉ. शिव ने कहा कि उसने अपनी मां को फिर से चुनावी मैदान में उतारने और जीत दिलाने का सपना देखा। इसके लिए उसने पेपर लीक कराने का रास्ता चुना ताकि जल्दी पैसे कमा सके।
शिव ने खुलासा किया कि प्रश्नपत्र प्रिंट करने का ठेका एक कोलकाता स्थित प्रिंटिंग प्रेस को दिया गया था, जिसकी जानकारी उसे केंद्रीय चयन परिषद के एक अधिकारी से मिली। इसके बाद उसने संपर्क साधा और पैसे का लालच देकर प्रश्नपत्र प्राप्त किया, जिससे परीक्षा में शामिल होने वालों से पेपर लीक कराया गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि संजीव मुखिया एक बड़ा गिरोह चलाता है, जो केवल बिहार ही नहीं, बल्कि झारखंड, यूपी, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी सक्रिय है। जैसे ही इन राज्यों में कोई बहाली निकलती है, ये लोग पेपर लीक करवाने में जुट जाते हैं। इस गिरोह में दो दर्जन से अधिक लोग शामिल हैं।
डॉ. शिव ने बताया कि पेपर लीक करने की प्रक्रिया इतनी गोपनीय होती है कि किसी को इसका पता नहीं चलता। उसके पिता, संजीव, पहले से जानते थे कि कौन सी परीक्षा कौन से आयोग द्वारा आयोजित की जा रही है। इसके बाद वह आयोग के कर्मियों या अधिकारियों से मिलकर प्रिंटिंग प्रेस की जानकारी हासिल करते थे। इसके बाद प्रिंटिंग प्रेस के कर्मियों और अधिकारियों की रेकी की जाती थी। प्रश्नपत्र को वाहन में लाने के दौरान उसे रोककर सील तोड़ी जाती थी और फिर सवाल का फोटो लेकर दूसरा सील लगाया जाता था।
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