पटना: बिहार में सभी सरकारी स्कूलों की साल में दो बार रैंकिंग की जाएगी। यह निर्णय शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और छात्रों के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव, डॉ. एस सिद्धार्थ ने इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं।

स्कूलों की रैंकिंग छात्रों की शैक्षिक उपलब्धियों के साथ-साथ उनके सामाजिक और भावनात्मक व्यवहार पर भी आधारित होगी। रैंकिंग नवंबर और मार्च के महीनों में जारी की जाएगी। डॉ. सिद्धार्थ ने 8 अगस्त को ‘शिक्षक मार्ग-दर्शिका’ जारी की थी, जिसमें शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं। प्राथमिक, मध्य और माध्यमिक/उच्च माध्यमिक विद्यालयों के लिए अलग-अलग रैंकिंग फॉर्मेट तैयार किए गए हैं। इसमें शिक्षण और अधिगम, संसाधनों का उपयोग, स्वच्छता, शिकायत निवारण और सह-शैक्षणिक गतिविधियों को शामिल किया गया है।

रैंकिंग कुल 100 अंकों पर आधारित होगी। इसमें वार्षिक और अर्धवार्षिक परीक्षाओं के औसत अंक के लिए अधिकतम 20 अंक, मासिक परीक्षा में छात्रों के औसत अंक के लिए 10 अंक, पिछले तीन महीनों में छात्रों की औसत उपस्थिति के लिए 10 अंक, शिक्षकों की औसत उपस्थिति के लिए 10 अंक और स्वच्छता के विभिन्न मानदंडों के लिए 15 अंक होंगे। व्यक्तिगत स्वच्छता पर अधिकतम 5 अंक दिए जाएंगे।

इसके अतिरिक्त, डॉ. सिद्धार्थ के निर्देश में बताया गया है कि विद्यालयों को ग्रेड और स्टार रेटिंग दी जाएगी। जो स्कूल 85 से 100 अंक प्राप्त करेंगे, उन्हें A+ ग्रेड और फाइव स्टार रेटिंग मिलेगी। 75 से 84 अंक पाने वाले स्कूलों को A ग्रेड और फोर स्टार रेटिंग मिलेगी। 50 से 74 अंक पाने वाले स्कूलों को B ग्रेड और 3 स्टार रेटिंग मिलेगी। 25 से 49 अंक प्राप्त करने वाले स्कूलों को C ग्रेड और टू स्टार रेटिंग मिलेगी, जबकि 0 से 24 अंक पाने वाले स्कूलों को D ग्रेड और एक स्टार रेटिंग दी जाएगी।

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