पटना: बक्सर के डीएम अंशुल अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि विशेष भूमि सर्वेक्षण के दौरान रैयतों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है। इंटरनेट पर कुछ भ्रांतियाँ फैलायी जा रही हैं, जो पूरी तरह से निराधार हैं। उन्होंने बताया कि वंशावली तैयार करने के लिए कहीं भटकने की आवश्यकता नहीं है; स्व-घोषित वंशावली ही मान्य होगी।
वंशज द्वारा भूमि की जानकारी प्राप्त करने की प्रक्रिया
रैयत या उनके वंशज को अपनी भूमि की जानकारी स्वघोषणा प्रपत्र दो भरकर अंचल शिविर या भू-अभिलेख एवं परिमाप की वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। खतियानी या जमाबंदी रैयत को वंशावली तैयार करने के लिए प्रपत्र -3 (i) भरकर शिविर में जमा करना होगा या वेबसाइट पर अपलोड करना होगा।
खतियान की प्रतिलिपि की आवश्यकता नहीं
अग्रवाल ने बताया कि विशेष भूमि सर्वेक्षण में खतियान की सच्ची प्रतिलिपि या अद्यतन ऑनलाइन राजस्व रसीद की आवश्यकता नहीं है। यदि ऑनलाइन लगान रसीद उपलब्ध नहीं है, तो ऑफलाइन रसीद भी स्वीकार की जाएगी। उन्होंने सर्वेक्षण कार्य में लगे कर्मचारियों को सख्त हिदायत दी कि किसी भी शिकायत की स्थिति में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
राजस्व रसीद की छाया प्रति जरूरी
अनुमंडल पदाधिकारी राकेश कुमार ने कहा कि स्वघोषणा के साथ राजस्व रसीद की छाया प्रति संलग्न करना अनिवार्य है। यदि जमीन खरीदी गई है, बदली गई है या दान में मिली है, तो उसकी छाया प्रति देनी होगी। इसके अलावा, अगर कोई न्यायालय या सक्षम प्राधिकार का आदेश है, तो उसकी छाया प्रति भी जमा करनी होगी।
मेढ़ नहीं होने पर सर्वे की समस्या
सर्वेक्षण कार्यक्रम में शामिल रैयतों ने अपनी समस्याएँ अधिकारियों के सामने रखीं। दिनेश राय ने कहा कि मौजा कोलिया बसगीतिया की लगभग दो हजार एकड़ ज़मीन में कहीं मेढ़ नहीं है। वहां इटीएम मशीन से सर्वे कैसे होगा, इसका कोई भी अधिकारी स्पष्ट उत्तर नहीं दे सका। दियारा क्षेत्र के कई गांवों में भी यही समस्या है। जिला बंदोबस्त अधिकारी ने बताया कि इस पर अलग से रणनीति बनाई जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि सिमरी अंचल के 159 मौजों में से 157 का सर्वे कार्य शुरू हो चुका है, जबकि दो मौजा टोपो लैंड हैं, जहां सर्वे कार्य नहीं होगा।
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