पटना: गांवों में चल रहे भूमि सर्वेक्षण के दौरान ग्रामीणों को खतियान की तलाश में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामसभा में अधिकारी और कर्मचारी खतियान की मांग कर रहे हैं, लेकिन अधिकांश ग्रामीणों के पास यह दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। इसके कारण वे रिकार्ड रूम जाकर खतियान खोजने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल रही है। रिकार्ड रूम की खिड़की के पीछे अक्सर भीड़ लगती है, जहां ग्रामीण रुपये लेकर कर्मियों से खतियान खोजने की गुहार लगाते हैं।
गुरुवार को जब खिड़की पर खड़े लोगों की स्थिति की जांच की गई, तो कई समस्याएं सामने आईं। कुटुंबा प्रखंड के फिरजपुर गांव से आए बृजमोहन यादव ने बताया कि वे पिछले 10 दिनों से रिकार्ड रूम का चक्कर काट रहे हैं। उनके परदादा हनुमान गोप के नाम का खतियान नहीं मिल रहा है। बृजमोहन ने कहा कि वे प्रतिदिन यहां आकर 19 एकड़ 99 डिसमिल का खतियान खोज रहे हैं, लेकिन मदद नहीं मिल रही है।
65 वर्षीय रामप्रवेश यादव ने बताया कि उनके दादा हलखोरी गोप के नाम का खतियान है, लेकिन यहां रुपये लेकर भी खतियान नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि रुपये देने वाले तो बहुत हैं, लेकिन खतियान खोजने वाले कम हैं। वे पिछले तीन दिनों से औरंगाबाद के रिकार्ड रूम का चक्कर लगा रहे हैं।
रफीगंज प्रखंड के भटकुर गांव के निवासी अमोद कुमार और संजीत कुमार ने बताया कि वे अपने दादा रघु दास के नाम की जमीन का खतियान खोज रहे हैं, लेकिन 10 दिनों से वे निराश हो रहे हैं। उनके पास केवल चार डिसमिल जमीन है और उन्हें डर है कि कहीं जमीन न चली जाए।
इसके अलावा, फोटो कॉपी की सुविधा के लिए भीड़ लग रही है। रिकार्ड रूम के पास ही नहीं, बल्कि फोटो स्टेट दुकानों पर भी सुबह से ही लंबी लाइनों की स्थिति है। नागरिक लाइन में लोग सुबह सात बजे से कागजात की फोटो कॉपी कराने के लिए खड़े रहते हैं। यहां प्रति कॉपी दो रुपये का शुल्क लिया जाता है।
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