KK Pathak वाला 'एक्शन' रिपीट!
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पटना: शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि राज्य के विश्वविद्यालयों को शिक्षक और कर्मचारियों के वेतन के लिए राशि तभी मिलेगी जब वे विभाग द्वारा जारी निर्देशों का पूरी तरह से पालन करेंगे। हाल के दिनों में विश्वविद्यालयों द्वारा इन निर्देशों का पालन न किए जाने के कारण वेतन भुगतान में समस्या उत्पन्न हो गई है। शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालयों को चेतावनी दी है कि वे सभी निर्दिष्ट दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करें ताकि अनुदान की प्रक्रिया शुरू की जा सके। इस संबंध में, शिक्षा विभाग के सचिव बैद्यनाथ यादव ने कुलपतियों को पत्र भेजा है, जिसमें पूर्व में भेजे गए पांच पत्रों का हवाला दिया गया है।

पत्र में कहा गया है कि विश्वविद्यालयों को शिक्षा विभाग के नवनिर्मित पे-रोल मैनेजमेंट पोर्टल पर सभी शिक्षकों और कर्मचारियों के संबंध में मूल डाटा अपलोड करना अनिवार्य है। इसमें वेतन, पेंशन, पारिवारिक पेंशन और अतिथि शिक्षकों का डाटा शामिल होना चाहिए। जबकि वेतन से संबंधित डाटा अपलोड हो चुका है, पेंशन और अतिथि शिक्षकों के मामले में कार्य अब भी शेष है। इस सख्त कार्रवाई की तुलना पूर्व में शिक्षा विभाग में केके पाठक की कार्रवाई से की जा रही है, जो अपने कड़े फैसलों के लिए मशहूर थे।

शिक्षा विभाग ने आठ अगस्त के पत्र का भी उल्लेख किया है, जिसमें सीएफएमएस (कंप्यूटरीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली) को लागू करने की अनिवार्यता की बात की गई थी। इस प्रणाली के लागू होने से पहले, विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को बचत, चालू और सावधिक जमा खातों में मौजूद सहायक अनुदान की राशि 15 दिनों के अंदर बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से उच्च शिक्षा निदेशालय में जमा करनी थी।

इसके अलावा, विभाग ने कहा है कि सीएफएमएस प्रणाली के माध्यम से विश्वविद्यालयों को अनुदान की अवशेष राशि को 30 अगस्त, 2024 तक ऑनलाइन रिफंड के माध्यम से राजकोष में वापस जमा करना होगा। कुलपतियों से अनुरोध किया गया है कि वे इन निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करें, ताकि भविष्य में अनुदान की विमुक्ति की जा सके।

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