पटना: बिहार में चल रहे विशेष भूमि सर्वेक्षण के तहत, राज्य सरकार ने आदेश जारी किया है कि नए खतियान (भूमि अभिलेख) बनाने के लिए परिवार की वंशावली में प्रत्येक बहन का नाम शामिल करना अनिवार्य होगा। यदि किसी परिवार द्वारा बहनों के नाम का उल्लेख नहीं किया गया, तो आपत्ति उत्पन्न हो सकती है। इस स्थिति से बचने के लिए, सभी परिवारों को अपनी वंशावली में बहनों के नाम को शामिल करना आवश्यक है।
जिला बंदोबस्त पदाधिकारी फिरोज अख्तर ने स्पष्ट किया कि नए खतियान के लिए वंशावली में बहनों के नाम का होना आवश्यक है। अगर कोई परिवार ऐसा नहीं करता है, तो इसे गलत माना जाएगा। यदि बहन अपनी संपत्ति में हिस्सेदारी नहीं चाहती हैं, तो इसके लिए वैकल्पिक उपाय उपलब्ध हैं।
पदोन्नति अधिकारी ने बताया कि वंशावली में बहनों के नाम के बिना दस्तावेज अधूरा माना जाएगा। बंदोबस्त कार्यालय जांच के दौरान बहनों के नाम को शामिल कर लेगा, इसलिए नाम छुपाने का कोई लाभ नहीं होगा। हालांकि, अगर किसी परिवार की बहन पिता की संपत्ति में हिस्सेदारी नहीं चाहती हैं, तो उन्हें एक शेड्यूल प्रस्तुत करना होगा, जिसमें वह लिखित रूप से यह कहें कि उन्हें संपत्ति से कोई लेना-देना नहीं है। ऐसी स्थिति में, नया खतियान भाइयों के नाम पर ही तैयार किया जाएगा।
बंदोबस्त अधिकारी ने यह भी बताया कि विशेष भूमि सर्वेक्षण के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच बंदोबस्त कार्यालय करेगा, इसलिए दस्तावेजों का मूल या प्रमाणित होना अनिवार्य नहीं है। इसके अलावा, निकाय से बचे गांवों में ग्रामसभा का आयोजन भी अन्य गांवों की तरह होगा। ग्रामसभा के 45 दिनों के भीतर प्रपत्र भरकर जमा करना होगा, लेकिन यह समय सीमा बढ़ाई जा सकती है, जिससे रैयतों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
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