पटना: बिहार में भूमि विवाद के बढ़ते मामलों के मद्देनजर, डबल इंजन सरकार ने राज्य में भूमि सर्वेक्षण कराने का निर्णय लिया था। 20 अगस्त से भूमि सर्वेक्षण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, हालांकि अभी भी 7 हजार गांवों में यह प्रक्रिया प्रारंभ नहीं हो पाई है। ऐसे में सरकार ने आदेश दिया है कि इन गांवों में एक सप्ताह के भीतर सर्वे शुरू किया जाए और सभी गांवों में ग्राम सभा का आयोजन किया जाए।

बिहार के लगभग 45 हजार गांवों में से करीब 38 हजार गांवों में भूमि सर्वेक्षण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। बाकी बचे लगभग 7 हजार गांवों में अगले सप्ताह ग्राम सभा आयोजित कर सर्वे की प्रक्रिया आरंभ की जाएगी। जहां सर्वे शुरू हो चुका है, वहां खतियान लेखन का कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। खतियान लेखन के बाद इसे मानचित्र के साथ किश्तवार प्रकाशित किया जाएगा।

शहरी या अधिसूचित क्षेत्रों, टोपो लैंड, या किसी अन्य विवाद के कारण 2,611 गांवों को सर्वेक्षण से बाहर रखा गया है। इन गांवों के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग अलग से नीति तैयार कर उन्हें सर्वेक्षण की प्रक्रिया में शामिल करेगा। भूमि से संबंधित सभी जानकारी ऑनलाइन या ऑफलाइन फॉर्म भरकर कैंप कार्यालयों में जमा कर सकते हैं।

प्रपत्र-2 में भूमि से जुड़ी जानकारी प्रदान करनी होगी, जिसमें रैयतों और हिस्सेदारों के नाम, पिता का नाम, पता, खाता, केसरा, रकवा, भूमि की श्रेणी, सेस को छोड़कर लगान की राशि, जमाबंदी संख्या और भूमि का दावा का आधार शामिल है। बंदोबस्ती या अन्य प्रकार की भूमि की जानकारी भी देनी होगी। भूमि सर्वेक्षण की जिम्मेदारी सभी बंदोबस्त पदाधिकारियों को सौंप दी गई है, जिन्हें सही ढंग से सर्वेक्षण कर रिपोर्ट विभाग को सौंपने का निर्देश दिया गया है।

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