पटना: बांग्लादेश में तख्तापलट के पूर्व हुए हंगामे हिंसा और आंदाेलन के बाद वहां मेडिकल की पढ़ाई कर रही 70 भारतीय छात्राएं वापस अपने वतन पहुंच गई हैं। कॉलेज अधिकारियों द्वारा कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्हें सुरक्षित रूप से भारत की बंगाल सीमा पर ले जाया गया, जो बांग्लादेश के साथ सीमा साझा करती है। वहां से सभी छात्र अपने-अपने घर पहुंचे. पटना के दानापुर और महुआ की छात्राओं ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि हम सभी कॉलेज में पुरी तरह सुरक्षित थे मगर हंगामे की खबर से डर लगता था मगर कॉलेज प्रशासन हमारी सुरक्षा के प्रति काफी गंभीर और मुश्तैद था।
दानापुर निवासी मेडिकल की छात्रा सैयद अम्बर फातिमा ने बताया कि भारत की कुल 70 छात्राएं बांग्लादेश के अदिन सकीना वूमेंस मेडिकल कॉलेज पूलर हॉट जैसौर में मेडिकल की शिक्षा ग्रहण कर रही थी। उनकी 3 वर्ष की पढ़ाई चल रही थी। वह सभी आराम से शिक्षा ग्रहण कर रही थी इसी बीच अचानक से आंदोलन शुरू हो गया और फिर यह आंदोलन हिंसक हो गया गया हिंसा होने लगी कई लोगों की जान चली गई।
पूरा बांग्लादेश जल उठा: छात्राएं
पूरा बांग्लादेश जल रहा था, खासकर ढाका में हालात बहुत खराब थे. जब हिंसा भड़की तो कॉलेज के अधिकारियों ने सुरक्षा उपाय कड़े कर दिए। हम सभी अंतर्राष्ट्रीय छात्र थे। इसी वजह से यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने हमारी सुरक्षा को ज्यादा गंभीरता से लिया. अचानक इंटरनेट बंद हो गया और हम सभी का अपने परिवारों से संपर्क टूट गया। हम सभी तीन दिनों तक अपने परिवारों से संपर्क करने में असमर्थ रहे। कॉलेज प्रशासन हम सब को कहा कि आप हालात ठीक नहीं हैं आप सभी अपने अपने घर चली जायें फिर जैसी हालात होगी वैसा आप को संदेश भेज दिया जायेगा। कॉलेज प्रशासन ने हम सभी 70 छात्राओं को कड़ी पुलिस सुरक्षा में भारत से लगने वाले बंगाल के बार्डर बैनापूल तक छोड़ दिया जहां से हम सभी कोलकता पहुंचे और वहां से अपने अपने घर को निकल लिया।
फोर्स की गाड़ी के साथ हम बॉर्डर पार कर पाए
सैयद अम्बर फातिमा ने बताया कि हमारे साथ हाजीपुर महुआ की एक छात्रा बुुशरा थी। कॉलेज प्रशासन ने हम सभी को अंडर फोर्स बार्डर तक सुरक्षित पहुंचा। इस दौरान हम लोगों ने रास्ते के लिए ज़रूरी सामन जमा कर लिया था। कॉलेज की बस में हम सभी को सवार कर आगे पीछे फोर्स की गाड़ी हम सभी बैनापूल पहुंचे जहां से ज़रूरी कागजी करवाई कर 1 घंटे में बॉर्डर पार कर भारत में एंटर किया वहां से हम लोग बंगाल जंक्शन पहुंचे और फिर लोकल ट्रेन से कोलकता 2 घंटे मेें पहुंचे। उसके बाद जिससे जहां जाना था वहां की ट्रेन पकड़ लिया कई के परिजन पहुंच गये थे। अम्बर और बुशना दोनों साथ ट्रेन पकड़ अपने घर पहुंची। अम्बर ने बताया कि अभी तक कॉलेज प्रशासन के द्वारा कोई संदेश नहीं दिया गया है कि कॉलेज कब से शुरू होगा। हम सभी संदेश की राह देख रहे हैं।
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