आरक्षण के निर्णय पर NDA में अलग-अलग सुर
आरक्षण के निर्णय पर NDA में अलग-अलग सुर

पटना: एससी/एसटी वर्ग में आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर एनडीए में असहमति नजर आ रही है. लोजपा (रामविलास) प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाया था और सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की बात कही थी हालांकि एनडीए में शामिल हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने चिराग पासवान को स्वार्थी बता दिय है।

SC / ST में आरक्षण के अंदर आरक्षण पर चिराग पासवान की अपत्ति पर जीतन राम मांझी ने कहा है कि जो आदमी बढ़ गया है वह आगे बढ़ते रहे और जो लोग पिछड़ गए हैं उनके बारे में सोंचा जाए इसलिए हम हर हालत में SC के निर्देश का स्वागत करते हैं। सुप्रीम कोर्ट का जो जजमेंट आया है वह 10 वर्ष पहले आना चाहिए था। बाबा साहेब के मुताबिक साक्षरता एक मानदंड है सबसे नीचे होने का। उन्होंने कहा कि एससी की साक्षरता दर महज 30 फीसद है। इस तीस प्रतिशत के भीतर कई जातियां हैं। तीस प्रतिशत से ऊपर वाली जातियों को आरक्षण का लाभ मिलता रहे मैं इसका विरोध नहीं करता हूं लेकिन जिन लोगों की साक्षरता दर 7-8 प्रतिशत है उसको तो आगे बढ़ाना ही चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि जो समाज में नीचे गिरा हुआ है, उसको आगे बढ़ाने के लिए प्रयास होना चाहिए।

आरक्षण के भीतर आरक्षण के निर्णय पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के यह कहने पर कि इस देश में दलितों के साथ होता है भेदभाव, दलितों को मंदिर में पूजा नहीं करने दिया जाता है और ना ही घोड़ी चढ़ने दिया जाता है, इसपर मांझी ने कहा कि ऐसी बात स्वार्थी लोग कह रहे हैं। भुइयां, मुसहर, डोम, मेहतर जाति के जो लोग हैं उनमें से कितने आईएएस, आईपीएस, इंजीनियर और चीफ इंजीनियर हैं? जो लोग आज क्षोभ व्यक्त कर रहे हैं चार जातियां उनका सब है तो इसका मतलब है कि सिड्यूल कास्ट का हक वही लोग लेते रहें? 76 साल से तो वह लोग लेते ही रहे हैं।

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