पटनाः 2024 लोकसभा चुनाव के बाद जेडीयू की पहली अहम राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक शनिवार को नई दिल्ली में हुई. इस बैठक में बिहार विधानसभा चुनाव के लिए मिशन 2025 की तैयारी पर चर्चा हुई. वहीं नीतीश कुमार के करीबी संजय कुमार झा को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नीतीश कुमार ने खुद संजय कुमार को जेडीयू अध्यक्ष चुनने का सुझाव दिया, जिसके बाद सर्वसम्मति से यह जिम्मेदारी संजय झा को सौंपी गई.
दरअसल, बिहार सरकार में पूर्व मंत्री रह चुके संजय कुमार झा नीतीश कुमार के करीबी माने जाते हैं. जेडीयू ने अब संजय झा को राज्यसभा सांसद नियुक्त कर नई जिम्मेदारी दी है. पहले से ही अफवाह थी कि नीतीश कुमार कार्यकारिणी बैठक में कोई अहम फैसला ले सकते हैं. बिहार की राजनीति में सत्तासीन के तौर पर जिन दो नामों की चर्चा थी उनमें पहला नाम संजय झा और दूसरा नाम मनीष वर्मा का था. कार्यकारिणी बैठक में जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने अहम फैसला लेते हुए संजय झा को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है. कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किये जाने के बाद संजय झा अब जेडीयू का कामकाज देखेंगे. राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद अभी भी नीतीश कुमार के पास है, इसलिए सभी महत्वपूर्ण निर्णयों पर अंतिम फैसला नीतीश कुमार का ही होगा.
आपको बता दें कि संजय झा जेडीयू के वह कड़ी हैं जिन्होंने नीतीश कुमार को एनडीए में वापस लाने में अहम भूमिका निभाई थी. ललन सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए JDU महागठबंधन में चली गई थी लेकिन ललन सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद छोड़ने के बाद पिछले वर्ष दिसंबर महीने में नीतीश ने JDU की कमान अपने हाथों में ली और संजय झा ने एक बार फिर से नीतीश कुमार और जेडीयू की वापसी NDA में कराई थी। पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद संजय झा का कद और भी बढ़ गया है। अब वे जेडीयू में नंबर दो के पोजिशन पर आ गए हैं।
संगठन को मजबूत बनाए जाने पर पार्टी नेताओं ने दिए कई सुझाव
जदयू नेताओं ने कहा कि इस बैठक में विभिन्न राज्यों की पार्टी इकाइयों की ओर से संगठन को मजबूत करने के लिए कई प्रस्ताव दिये गये. बैठक में सभी इस बात पर सहमत हुए कि पार्टी नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही आगे बढ़ेगी. इस दौरान झारखंड विधानसभा चुनाव में जेडीयू उम्मीदवार उतारने को लेकर भी चर्चा हुई. बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि मंत्रियों और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच संवाद होना चाहिए. जब कोई मंत्री क्षेत्र का दौरा करता है, तो बूथ स्तर पर पार्टी कार्यकर्ता इसके बारे में जानकारी मिल सके।
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