पटना: बिहार में हाल ही में पुल और पुलियों के ध्वस्त होने की घटनाएं बढ़ गई हैं, जिसके चलते सरकार की आलोचना हो रही है। इस संदर्भ में, नीतीश सरकार ने निर्णय लिया है कि पिछले 10 वर्षों में निर्मित सभी पुलों और पुलियों की एनओसी (अनापत्ति प्रमाणपत्र) की शर्तों की जांच की जाएगी। जल संसाधन विभाग ने इस प्रक्रिया के तहत अपने क्षेत्रीय अधिकारियों से रिपोर्ट भी मांगी है। इसके अंतर्गत पुलों के अलावा अन्य सभी संरचनाओं की भी जांच की जाएगी। पिछले एक महीने में, बिहार में दो दर्जन से अधिक पुलों और पुलियों के गिरने तथा डायवर्जन बह जाने की घटनाएं हुई हैं, जिससे नीतीश सरकार विपक्षी दलों के निशाने पर आ गई है।
आरजेडी प्रमुख लालू यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एनडीए सरकार पर आरोप लगाते हुए इसे लेकर आलोचना की थी, जिससे राजनीति भी गर्मा गई। इसके चलते, सरकार ने पुलों और पुलियों की जांच की जिम्मेदारी विभाग के सभी क्षेत्रीय मुख्य अभियंताओं, अधीक्षण अभियंताओं और केंद्रीय रूपांकण, शोध एवं गुणवत्ता नियंत्रण के मुख्य अभियंताओं को सौंप दी है। इन अधिकारियों से कहा गया है कि वे क्षेत्रीय स्तर पर एनओसी की शर्तों के अनुपालन की रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय को प्रस्तुत करें। हालांकि, पहले जांच पांच वर्षों के लिए निर्धारित की गई थी, लेकिन समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि गड़बड़ी के संकेत पहले की भी हो सकते हैं।
विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि जिन जिलों या विभागों में पुलों और पुलियों का निर्माण हुआ है, वहां एनओसी की शर्तों का कितना पालन हुआ है। यह देखा जाएगा कि निर्धारित मानकों का पालन किया गया है या नहीं, और यदि शर्तों का उल्लंघन हुआ है तो उसका कितना प्रभाव पड़ा है। सरकार इस मुद्दे को लेकर गंभीर है, इसलिए पथ निर्माण विभाग ने सभी पुलों का ऑडिट भी कराया है, जिसमें पुल निर्माण निगम ने 1700 पुलों की जांच की है।
इस बीच, हाल के महीनों में पुलों और पुलियों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं लगातार सामने आई हैं। इसके जवाब में, सरकार ने पहले सर्वेक्षण कराया और अब एनओसी की शर्तों की जांच करने का निर्णय लिया है।



































